चुम्बक चिकित्सा क्या है ? कैसे पानी को चुम्बकित करके इलाज किया जा सकता है ?

चुंबकीय थेरेपी – चुंबक थेरेपी या मेग्नेट थेरेपी एक प्रकार की वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति है। जो दर्द और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को कम करने के लिए चुंबकों के उपयोग द्वारा की जाती है। इनके उपयोग भी दो तरीके से किये जाते है , पहले तरीके में चुम्बक को सीधे उस स्थान पर लगाया जाता है जहा दर्द या पीड़ा होती है दुसरे तरीके में चुम्बकीय पानी बनाया जाता और उसे पिया या लगाया जाता है |



चुम्बकीय पानी कैसे तैयार करे ?

सबसे पहले एक कांच की बोतल ले और उसमे पानी भरकर एक डाट लगा के फिट कर दे | अब बोतल के दोनों तरफ इस तरह चुम्बक लगाये की उसका एक और उत्तर ध्रुव की तरफ और दूसरा ध्रुव दक्षिण ध्रुव की तरफ आये | ऐसे चुम्बक ले जो लगभग २००० से ३००० गोस की शक्तिवाले हो अब इस बोतल को इस तरह जमाके रखे की चुम्बक का उत्तर ध्रुब उत्तर दिशा की तरफ और दक्षिण ध्रुव दक्षिण दिशा की तरफ हो |

कितना समय लगता है ?

सामान्यता 24 घंटो में चुम्बकित पानी तैयार हो जाता है पर अगर किसी को जल्दी प्रयोग में लेना हो तो 12 से 14 घंटे के बाद प्रभावित जल का प्रयोग कर सकते है | 

एक बार चुम्बकित पानी तैयार होने के बाद उसे न तो गरम करना चाहिए और न ही फ्रिज में रखना चाहिए |

कितना असरदार है ?

चुम्बकित किया हुआ पानी ओषधिय गुणों से भरपूर होता है जानते है कैसे :-

1. स्वस्थ वयक्ति अगर इसका उपयोग रोजाना करते है तो इससे उनकी पाचन क्रिया में सुधर होता है और जितना भी थकान है वो मिटा देता है |

2. ये पानी रक्त वाहिनियो में जमा कोलेस्ट्राल हटा देता है और इसे और ज्यादा जमने से भी रोकता है एसा करके ये पानी हृदय की कर्यषमता को भी बढ़ाता है |

3. सबसे ज्यादा ये पानी फायदेमंद मूत्राशय,पित्ताशय और मूत्रपिंड से सम्बंधित तकलीफों में होता है |

4. जिन व्यक्तियों में पथरी की परेशानी होती है उनके लिए ये काफी फायदेमंद होता है | इस पानी को पीने से पथरी पिघल जाती है |

5. स्त्रियों में ये पानी काफी फायदेमंद होता है उनमे मासिक धर्म से सम्बंधित तक्लीफ्फे ठीक करता है और गर्भाशय में भी कोई परेशानी होने पर इस पानी से आसानी से इलाज किया जा सकता है |

6. बच्चो में सर्दी , खासी,,बुखार, या दमा की तकलीफ होने पर ये चुम्बकीय पानी काफी असरदार होता है |

7. कही जहर लगने पर भी ये पानी दिया जा सकता है ये जहर के असर को तुरंत कम कर देता है |

किस मात्रा में ले ?

बड़े लोग इस पानी का सेवन दिन में चार बार आधा आधा गिलास करे |

बच्चो को ये पानी पाव गिलास दे 

बुखार होने पर चुम्बकित पानी की मात्र थोड़ी ज्यादा ले सकते है |

इस पानी को पीने के अलावा जख्मो को साफ़ करने में , आंखे धोने में या फिर किसी स्थान पर जलने पर किया जा सकता है |

क्या सावधानिय रखे ?

1. चुम्बकों का प्रयोग करते समय अथवा उसके बाद आइसक्रीम जैसी  ठण्डी चीजे खाने-पीने पर ये  चुम्बकों के प्रभाव को अनावश्यक रूप से कम कर देंगी।

2. भोजन करने के बाद दो घंटे तक चुम्बकीय उपचार न लें, भोजन करने के बाद तुरंत यह उपचार लेने से उलटी-उबकाई की तकलीफ होने की संभावना रहती है। 

3. गर्भिणी स्त्रियों पर चुम्बकों का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि इससे कभी-कभी गर्भपात हो जाता है। 

4. शक्तिशाली चुम्बकों के विरोधी ध्रुवों को एक-दूसरे के संपर्क में न आने दें। कभी अकस्मात्‌ अँगुली बीच में आ जाए तो कुचल जाने की संभावना रहती है।

6. उपचार के समय शरीर से गहना या ऐसी वस्तुओं को हटा देना चाहिए जो चुम्बकत्व का शोषण कर लेते हैं। कुछ बिजली के उपकरण तथा घड़ियाँ भी चुम्बकों के प्रभाव से नष्ट हो सकती हैं, यदि उन्हें चुम्बकों से दूर नहीं रखा जाए। अतः चुम्बकों को इनसे दूर रखना चाहिए।


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